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सोशल मीडिया : एक धोखा

Posted On: 12 Oct, 2017 में

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जब स्मार्ट फ़ोन का अविष्कार हुआ होगा तो किसी ने भी ये नहीं सोचा होगा की इसका इस्तेमाल दुनिया के सबसे खतनाक हथियार की तरह हो सकता है।
नहीं नहीं,में इस से होने वाली बिमारिओ की बात नहीं कर रहा हूँ बल्कि में तो इस से होने वाली लड़ाइओ की बात कर रहा रहा हूँ । आज हमारे देश में जितने भी दंगे हो रहे है उसमे से ९०% दंगो का कारन यही स्मार्ट फ़ोन और कह सकते है सोशल मीडिया है । अगर इन चीजों का प्रभाव हमारे समाज पे इतना नहीं होता तो क्यों कही भी दंगे भड़कते ही इंटरनेट की सेवा बंद करदी जाती है। इसका सिर्फ और सिर्फ एक ही कारन है अफवाहे और कह सकते है “फेक न्यूज़ “।

आज हमारे समाज में लोग दिमाग से ज्यादा दिल से सोचते है, उनकी भावनाये कुछ ज्यादा ही जल्दी दुःख जाती है और वो कभी भी उग्र हो सकते है । बहुत से लोग इसका फायदा अपने झूठे प्रोपेगण्डे फैलाने में करते है और आगे भी करेंगे । बहुत से लोगो के घर इन झूठे प्रोपोगंडा फैलाने से चल रहे है,लोगों को गुमराह किया जा रहा है और सबसे अच्छी बात ये है की इस बात को बिना जाने लोग गुमराह हो भी रहे है ।

सोशल मीडिया का इस्तेमाल सोशल लाइफ जीने के लिए होना चाहिए था, पर आज तो इसका इस्तेमाल न्यूज़ बाटने में हो रहा है। मैं मानता हूँ न्यूज़ बाटना गलत नहीं है , पर प्रमरिकता क्या है इन न्यूज़ की । क्या कभी कोई ये जानने की कोशिश करता है? नहीं, करेगा भी कैसे क्योकि खबर पहुंचाई ही ऐसे जाती है की आम लोग खबर पढ़कर सिर्फ दिल से सोचे दिमाग से नहीं । अगर आपने अपना दिमाग का इस्तमाल कर लिए तो उन लोगो का घर कैसे चलेगा। आम जनता का इतना अच्छी तरह से इस्तेमाल हो रहा है और लोगो को पता भी नहीं है ।

आज फेसबुक पर कोई भी धर्म से जुडी हुई चीज पोस्ट करता है और लोगो को आपस में लड़ा देता है। क्या कभी आप लोगो ने उस पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी सचाई जान नी चाही है । नहीं , कभी भी नहीं क्योकि धर्म और जाती के नाम पर हम लोगो को इतना कमजोर बना दिए गया है की जैसे ही कही भी हमारा धर्मऔर जाती आती है हम अपने सोचने की शक्ति खो देते है और विभिन तरह के लोग इसका फायदा उठा लेते है। क्या वाकई में हमारे धर्म ने हमे इतना कमजोर बना दिया है ?

आज बहुत सी जगहों पर लोग आपस में फेक न्यूज़ पर लड़ रहे होते है और अपनी बातो को सच साबित करने के लिए विभिन तरह के तर्क दे रहे होते है । पर उसमे से किसी ने अपनी ही खबर की सचाई जाने की कोशिश नहीं करि होती । आज ४० से ज्यादा के उम्र के लोग इन फेक न्यूज़ का शिकार सबसे ज्यादा हो रहे है उन लोगो के लिए उनके व्हाट्सप्प या फेसबुक पे लिखी हुई बात पत्थर की लखीर जैसी होती है। वो उस पर आंख बंद करके यकीन करते है, उन लोगो में भी जागरूकता फैलाना बहुत जरुरी हो गया है। अगर आज हमे अपना समाज बचाना है तो ।

कभी खबर आती है की १० के सिक्के नकली है और कभी खबर आती है की ५०० के नोट ने गाँधी जी के पास तार वाला नोट असली है। कोई भी कुछ भी पोस्ट कर रहा है और हम आम लोग उसे मान रहे है, बिना उसकी

जांच किए । ना जाने कितने लोगो ने नुकशान उठाया है इन फेक न्यूज़ की वजह से और आगे भी उठाते रहेंगे।

आज लोगो को मसालेदार खबरे ज्यादा आकर्षित करती है , सच खबरों से ज्यादा । हम लोग उन खबरों की तरफ ज्यादा आकर्षित होते है जिन खबरों में अश्लीलता होती है । क्या हमारी ठरक पर हमारा कोई काबू नहीं है क्या? क्या हम इतने कमजोर है ? आज यूट्यूब पर अश्लील वीडियोस क्यों ट्रेंडिंग में होती है ? सिर्फ एक ही जवाब है इस सब का हम सिर्फ देखना ही गलत चाहते है। हमें लोग जिंदगी के मजे लेने में इतने मसगूल हो रहे है की अपनी सचाई से ही दूर हो रहे है ।
आज हम लोगो को समझना चाहिए की टेक्नोलॉजी के युग में सचाई से खेलना कोई नयी बात नहीं है । कोई भी फोटो कभी भी बदली जा सकती है, किसी भी वीडियो को कभी भी गलत बनाया जा सकता है।व्हाट्सप्प और फेसबुक न्यूज़ चैनल्स नहीं है ,बल्कि सोशल साइट्स है। तो जिसका जो काम है वो वही रहे तो अच्छा है ।
हां , बोलने की आज़ादी सबको है, पर सच बोलने की आज़ादी । ना ,की अफवाह फैलाने की ,लोगो की भावनाओ से खेलने की । और हम लोगो को भी समझना चाइये की हर यूट्यूब चैनल पे बता आदमी इकोनॉमिस्ट नहीं है , हर पोलिटिकल चैनल पर बैठा आदमी पॉलिटिशियन नहीं है। सोशल मीडिया का इस्तमाल के समय दिमाग का प्रयोग करे दिल का नहीं। इस देश को तोड़ने वाले लोग बहुत कम है पर उन लोगो को इशारो पर नाचने वाले बहुत सारे तो हमारी समझ हमारे हाथ में है । ना मुर्ख बने और ना ही बनाये ।

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